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1.
उच्च शिक्षा को एक नियामक के दायरे में लाने के लिए प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक को मानसून सत्र में पारित कराने के लिए सरकार ने भले ही सूचीबद्ध किया है, लेकिन अभी इसे लेकर और इंतजार करना पड़ेगा। विधेयक को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने अपने सुझावों को अंतिम रूप देने से पहले कुछ और राज्यों और हितधारकों के साथ चर्चा के संकेत दिए हैं।
2.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इस हफ्ते (22-23 जुलाई) को फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने पहुंच रहे हैं। इस दौरान क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया) देशों के विदेश मंत्रियों की भी बैठक होगी। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक अमेरिका की पहल पर हो रही है। यह गत दो माह में क्वाड विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक होगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दिनों में क्वाड को कम महत्व दिया गया था। अब ट्रंप प्रशासन इस समूह को लेकर गंभीरता दिखा रहा है।
3.
उत्तराखंड, गुजरात, असम के बाद अब मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला चौथा राज्य बन गया है। मंगलवार को विधानसभा में कड़े प्रविधान वाला यह विधेयक पारित हो गया। राज्यपाल की सहमति मिलने के बाद राज्य में विवाह, वसीयत और तलाक पर सभी धर्मों के लिए एक समान नियम लागू होंगे। ध्वनिमत से पारित हुए इस विधेयक में किए गए प्रविधान के मुताबिक, राज्य में मुस्लिम पर्सनल ला की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
4.
भारत सरकार ने देश में डेंगू से बचाव के लिए उपलब्ध होने वाले पहले टीके 'क्यूडेंगा' की बिक्री को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि टाकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया के इस टीके को गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद आम लोगों के उपयोग के लिए अनुमति दी गई है।
5.
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो पाएंगे कि हम झींगे, लौह अयस्क, नैफ्था, अरंडी का तेल, ग्रेनाइट, मिर्च और मानवीय केश ही उसे मुख्य रूप से निर्यात करते हैं। हम टीवी स्टूडियो में आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं, लेकिन आंकड़े अपनी कहानी स्वयं कहते हैं। वर्ष 2025-26 में भारत ने चीन से 131.6 अरब डालर का आयात किया, जो एक साल पहले की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक रहा। इसी दौरान भारत ने चीन को 19.5 अरब डालर का निर्यात किया। इसमें 112 अरब डालर का व्यापार घाटा किसी भी देश के साथ सबसे बड़ा व्यापारिक असंतुलन है। हम चीन को एक रुपये का जो सामान बेचते हैं, उसके बदले में उससे सात रुपये का सामान खरीदते हैं। यह तब है, जब एक साल में चीन को हमारा निर्यात 36 प्रतिशत बढ़कर 13 अरब डालर हो गया है।
6.
सिंगापुर शहरी विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को समान महत्व देकर बगीचों के बीच बसे एक शहर (ए सिटी इन ए गार्डन) के रूप में स्थापित करने वाला दुनिया का पहला देश है। दरअसल सिंगापुर के कुल भू-क्षेत्र का आधा हिस्सा अब हरित आवरण से आच्छादित हो चुका है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है कि सीमित भूमि (700 वर्ग किलोमीटर) की उपलब्धता के बावजूद हरियाली को संरक्षित करते हुए सिंगापुर ने विकास का नया माडल प्रस्तुत किया है। इसके जरिए वह न सिर्फ जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ढाल तैयार कर रहा है, बल्कि सतत विकास का लक्ष्य भी हासिल कर रहा है।
7.
हाल में हैदराबाद के एक स्टार्टअप-स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित राकेट विक्रम-1 की उड़ान भारत की अंतरिक्ष नीति में आ रहे एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। दरअसल 21वीं सदी की अंतरिक्ष यात्रा केवल इसरो जैसी सरकारी एजेंसियों के भरोसे आगे नहीं बढ़ सकती। यदि भारत को अंतरिक्ष विज्ञान को अपने आर्थिक विकास, नवाचार, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का इंजन बनाना है तो इस क्षेत्र में निजी उद्योग की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है
8.
अमेरिका में निजी क्षेत्र ने सरकारी एजेंसी के समानांतर अपनी स्वतंत्र क्षमता विकसित की, जबकि भारत में इसरो स्वयं निजी उद्योग का मार्गदर्शक, प्रौद्योगिकी सहयोगी और नियामकीय साझेदार बना हुआ है। यही भारतीय माडल की विशेषता है। भारत में प्रतिस्पर्धा के मुकाबले सहयोग पर ज्यादा बल दिया गया है। यह माडल भारत की संस्थागत क्षमता सीमित संसाधनों, दोनों के अनुकूल भी है। भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल इसरो तक सीमित नहीं है।
9.
भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था है, जिसकी आधारशिला ग्राम सभा है। संविधान के 73वें संशोधन ने ग्राम सभा को केवल एक वैधानिक संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वशासन की सर्वोच्च इकाई के रूप में स्थापित किया, जहां प्रत्येक मतदाता स्थानीय विकास, पंचायत के बजट, सरकारी योजनाओं और जनहित के निर्णयों में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सकता है। महात्मा गांधी का "ग्राम स्वराज" भी इसी विचार पर आधारित था कि विकास के वास्तविक केंद्र गांव और वहां की जनता हों, लेकिन यदि गांव का नागरिक ही ग्राम सभा से दूरी बनाने लगे तो यह केवल पंचायत व्यवस्था का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद का संकट है।
10.
गत दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सोनीपत-जींद रेलखंड पर भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाना केवल एक नई रेल सेवा का शुभारंभनहीं था। यह उस नई तकनीकी यात्रा का उद्घोष था, जो रेलवे की सीमाओं से आगे बढ़कर स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की बढ़ती आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करती है। लगभग दो शताब्दियों से रेल परिवहन मुख्यतः तीन प्रकार की ऊर्जा पर आधारित रहा है-भाप, डीजल और ओवरहेड विद्युत। हाइड्रोजन इस क्रम में एक चौथा विकल्प प्रस्तुत करती है। इस ट्रेन में ईंधन को इंजन में जलाया नहीं जाता। इसके स्थान पर ट्रेन अपने साथ हाइड्रोजन लेकर चलती है, जो फ्यूल सेल में आक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर विद्युत उत्पन्न करती है। यही विद्युत ट्रैक्शन मोटरों को चलाती है। इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ जल उत्सर्जित होता है। हाइड्रोजन ट्रेन कोई एक तकनीक नहीं है। यह अनेक अत्याधुनिक प्रणालियों-हाइड्रोजन भंडारण, फ्यूल सेल, लिथियम बैटरी, पावर इलेक्ट्रानिक्स, ट्रैक्शन नियंत्रण, डिजिटल मानिटरिंग, सुरक्षा व्यवस्था और रेलवे संचालन का सफल समन्वय है।
11.
यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के अमल में भारतीय खाद्य की गुणवत्ता का मसला चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआइ) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत को भी ईयू की तरह आयातित खाद्य की गुणवत्ता को मापने में कड़े नियम अपनाने चाहिए। ईयू भारतीय खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर आए दिन सवाल खड़े करता रहता है और कई भारतीय खाद्य आइटम के निर्यात पर प्रतिबंध लगा देता है। अन्य विकसित देश भी भारतीय खाद्य पदार्थों में अधिक कीटनाशक का हवाला देकर उन पर रोक लगाते रहते हैं। जबकि भारत में आयातित फूड की गुणवत्ता की जांच ईयू या अन्य विकसित देशों की तरह कई चरण में नहीं होती है।
12.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कनाडा के ज्यादातर उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की। उन्होंने अपने इस कदम के पीछे दलील यह दी है कि पड़ोसी देश अमेरिकी वाहनों, शराब और डेरी उत्पादों से अनुचित भेदभाव करता है। ये टैरिफ 19 अगस्त से प्रभावी हो जाएंगे। ट्रंप के इस नए कदम से आर्थिक अनिश्चितता का नया दौर शुरू होने और दोनों देशों के संबंधों में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
13.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तर मैसेडोनिया की संसद को संबोधित कर कहा, वैश्विक परिदृश्य जब संघर्ष व आर्थिक विभाजन से तार-तार हो गया है, भारत की प्राचीन विचारधारा "वसुधैव कुटुम्बकम" का आह्वान है, "दीवारें नहीं, पुल बनाएं।" तीन-देशों की राजकीय यात्रा के दूसरे चरण में उत्तर मैसेडोनिया में राष्ट्रपति मुर्मु ने मंगलवार को यहां की संसद में कहा, कोई भी देश अलगाव से समृद्ध नहीं हो सकता। भारतीय सभ्यता 'वसुधैव कुटुम्बकम' की विचारधारा पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि दुनिया एक परिवार है। कहा, लोकतंत्र सिर्फ शासन प्रणाली नहीं, बल्कि साझा विश्वास का लेख है जो भारत व उत्तर मैसेडोनिया को एकजुट करता है। भारत की संसद 1.4 अरब से अधिक नागरिकों की आकांक्षाओं को दर्शाती है और राष्ट्र को लोकतांत्रिक आवाज देती है।
14.
संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह अब एशिया से बाहर भी तेजी से अपना नेटवर्क फैला रहे हैं। ये गिरोह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), क्रिप्टोकरेंसी और एन्क्रिप्टेड संचार जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर आनलाइन ठगी, मनी लांड्रिंग, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसे संगठित अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, केवल आनलाइन ठगी के कारण वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर 88.3 अरब से 114.1 अरब डालर तक का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है।
15.
नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) जलवायु अध्ययन का बड़ा हब बनने जा रहा है। भारत जलवायु अवलोकन नेटवर्क (बीकोन) के तहत देवस्थल (नैनीताल) में इसके लिए प्रयोगशाला स्थापित होगी। एरीज और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आइआइटीएम) पुणे के इस संयुक्त मिशन में अगले 50 सालों तक जलवायु पर असर डालने वाली ग्रीनहाउस गैस, वातावरण में कम समय तक रहने वाले कारक, वायुमंडल की केमिस्ट्री और मिट्टी की नमी का अध्ययन किया जाएगा।
16.
साल 2023 में सड़क हादसों में विश्वभर में 13.40 लाख लोगों की मौत हुई जबकि 5.09 करोड़ से अधिक लोग जख्मी हुए। एक नए अध्ययन के अनुसार, सड़क पर होने वाली मौतों और चोट लगने की मुख्य वजह वाहनों की टक्कर थी। द लैंसेट पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि सड़क पर लगने वाली चोटें 10-39 वर्ष के युवाओं के बीच मृत्यु का प्रमुख कारण रहीं और पांच से नौ वर्ष के बच्चों की मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह रहीं। कुल मिलाकर सड़क पर लगी वाली चोटें वैश्विक स्तर पर मृत्यु का 11वां प्रमुख कारण रहीं। शोधकर्ताओं ने कहा कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में बेहतर ट्रामा केयर कवरेज के माध्यम से हर साल दो लाख से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती है।

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