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1.
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता के 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंचने के बाद चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू कर दीं। सोमवार को दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 324 दर्ज किया गया। ग्रैप आपातकालीन उपायों का एक समूह है, जिन्हें वायु गुणवत्ता एक निश्चित स्तर पर पहुंचने के बाद प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ने से रोकने के लिए लागू किया जाता है। दरअसल, ग्रैप का पहला चरण तब लागू होता है, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 201 से 300 के बीच होता है। दूसरा चरण एक्यूआइ के 301 से 400 के बीच होने पर लागू किया जाता है। तीसरा चरण 401 से 450 के बीच एक्यूआइ होने पर लागू होता है, जबकि चौथा चरण एक्यूआइ 450 से अधिक होने पर लागू किया जाता है। दूसरे चरण के तहत निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने, पार्किंग शुल्क बढ़ाने, खुले में कचरा जलाने और निर्माण से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण सहित कई कदम उठाए गए हैं।
2.
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में किसी भी नई तकनीक की सफलता का पैमाना किसान की पहुंच और उसके जीवन पर पड़ने वाला असर होना चाहिए। यहां छोटे और सीमांत किसानों की बड़ी संख्या है, जिनके लिए खेती की लागत में मामूली बढ़ोतरी भी आर्थिक दबाव पैदा कर सकती है। इसलिए नई तकनीक सस्ती, आसानी से उपलब्ध और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल होनी चाहिए। उसके इस्तेमाल के तरीके, संभावित लाभ और सीमाओं के बारे में किसानों को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। यह भी देखना होगा कि लक्षित जैविक प्रक्रिया को प्रभावित करने से पौधे के दूसरे गुणों पर कोई अवांछित असर तो नहीं पड़ता। किसी नई तकनीक को अपनाने से पहले उसके लाभों के साथ जोखिमों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
3.
र्ष 1990 से 2023 के बीच C 'आस्टियोआर्थराइटिस' के कारण दुनिया में दिव्यांगता 65 फीसद बढ़ गई है। बढ़ता मोटापा, बुजुर्ग आबादी और जोड़ों में लगने वाली चोटें आने वाले वर्षों में इस संकट को और गहरा सकती हैं। बीमारी का असर केवल जोड़ों के दर्द तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यक्ति की चलने-फिरने, सक्रिय रहने और अपनी पसंद के काम करने की आजादी भी छीन सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, 'आस्टियोआर्थराइटिस' को अब तक स्वास्थ्य नीतियों में वह जगह नहीं मिली है, जिसकी यह बीमारी हकदार है। इसे अक्सर उम्र बढ़ने के साथ होने वाली सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। नतीजतन, मरीजों को समय पर सही उपचार, जरूरी जानकारी और पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती। कर्टिन यूनिवर्सिटी के 'स्कूल आफ एलाइड हेल्थ' से जुड़े और अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर एंड्रयू ब्रिग्स का कहना है कि दुनिया की स्वास्थ्य प्रणालियां इस बीमारी के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए तैयार नहीं हैं।
4.
भारत ने 2070 तक 'नेट-जीरो' का लक्ष्य रखा है और बिजली क्षेत्र में बिना कोयले या तेल वाले ऊर्जा स्रोतों को बढ़ाने के लिए बहुत तेजी से काम किया है। अक्तूबर में, भारत की बिजली क्षमता 500 गीगावाट से अधिक हो गई, जिसमें आधे से ज्यादा हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का है। भारत की बढ़ती क्षमता की खबरें आम हैं। लेकिन केवल क्षमता बढ़ाने से बिजली मिलने की गारंटी नहीं मिलती, क्योंकि यह ग्रिड की तैयारी, उसे आपस में जोड़ने और बिजली के भंडारण पर निर्भर करता है। कागजी क्षमता और असल में बनने वाली बिजली के बीच एक बड़ा अंतर है गैर-जीवाश्म ईंधन की 52 फीसद स्थापित क्षमता में से, केवल लगभग 29 फीसद ही असल में बिजली पैदा कर पाती है।
5.
केंद्र सरकार ने वीबी-जीरामजी अधिनियम-2025 के तहत शिकायतों के निवारण के लिए नियम अधिसूचित किए हैं, जिनके अनुसार ग्रामीण रोजगार योजना के कार्यान्वयन से जुड़ी शिकायतों का समाधान 15 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है। यही नहीं, अगर निर्धारित समय-सीमा के भीतर शिकायतों का समाधान नहीं हो पाता है, तो उन्हें उच्च स्तर पर भेजने की व्यवस्था भी की गई है।
6.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को निवेशकों से भारत में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि देश में राजनीतिक और नीतिगत स्थिरता है तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि देश अगले 10 से 11 साल में करीब 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
7.
रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि उसने नौसेना के लिए आठ युद्धपोत खरीदने के वास्ते दो सरकारी जहाज निर्माण कंपनियों के साथ 53,866 करोड़ रुपए के अनुबंध किए हैं। मंत्रालय ने बताया कि ये अनुबंध गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) के साथ किए गए हैं जिनके तहत आठ अगली पीढ़ी के कार्वेट (एनजीसी) खरीदे जाएंगे। कार्वेट छोटे आकार के, तेज गति से चलने वाले युद्धपोत होते हैं, जो फ्रिगेट और विध्वंसक युद्धपोतों की तुलना में आकार में छोटे होते हैं।
8.
भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की है। इस समझौते पर दिसंबर में हस्ताक्षर होने हैं। आधिकारिक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी गई। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले सप्ताह ब्रसेल्स यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर चर्चा की।
9.
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी की खाड़ी देश की दो दिवसीय यात्रा के दौरान ऊर्जा एवं व्यापार समेत विभिन्न महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया। मिसरी की यह यात्रा सोमवार को समाप्त हुई।
10.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने सोमवार को वियतनाम के जन सुरक्षा मंत्री जनरल लुओंग टैम क्वांग के साथ उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान सुरक्षा के क्षेत्र में जारी सहयोग की समीक्षा की और मौजूदा बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
11.
आइसीसीआइ ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के समन्वय से 'ओवरशूट एंड द क्रायोस्फीयर' नामक यह रिपोर्ट तैयार की है। यह यूएनईपी की हालिया रिपोर्ट 'लिमिटिंग ओवरशूट' की पूरक रिपोर्ट है। 'लिमिटिंग ओवरशूट' रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगले कुछ वर्षों में वैश्विक तापमान में पूर्व-औद्योगिक स्तर की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की सीमा अस्थायी रूप से पार हो सकती है। वहीं, 'ओवरशूट एंड द क्रायोस्फीयर' रिपोर्ट में बताया गया है कि तापमान के इस सीमा से ऊपर जाने, चरम पर पहुंचने और फिर घटने का पृथ्वी के 'क्रायोस्फीयर' पर क्या असर पड़ेगा। 'क्रायोस्फीयर' में पृथ्वी की सतह के वे हिस्से शामिल हैं, जहां पानी ठोस और जमे हुए रूप में मौजूद होता है जैसे ग्लेशियर, बर्फ की चादरें और समुद्री बर्फ आदि। किर्कहम ने बताया कि आने वाले दशकों में समुद्र का स्तर बढ़ने से करोड़ों लोग प्रभावित होंगे।

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